https://youtu.be/wo1I-DhkZLc
इश्क़
इश्क़ करो तो उसकीं रूह से करो ,
आबरू से क़्यो करते हो !
देखो तो दिल में देखो,
बदन को क़्यो देखते हो !!
या तो उसे बाग़ के किसी पुष्प की तरह संम्भाल कर रखों!
या फिर उसकी शमा में जलकर राख हो जाओ!!
लाख़ बंदिशे लगाई उसकी उड़ान पर,
और काट दिए सारे पंख !
पर क़्या रोक सके उसकी उड़ान को??
क़्या रोक सके उसकी उड़ान को!
किसी की रहमतों से नहीं ,
अपने होशलों से बहती है वो !!
उसका समंदर जैसा प्यार भी,
तुम्हारी हवस रूपी तृष्णा को न मिटा सका !
तुम काटते रहे सारे पर ,
पर क्या रोक सके उसकी उड़ान को !!
तवायफ तो ढूंढ लेती है, औरतों में , नजरें तुम्हारी!
क़्या कभी तवायफ़ों में औरतों को देखा हैं ??
आशिफ़ा हैं मुनंतजिर, निर्भया हैं मुनंतजिर,
के शक्त कानून हो उन शैता क़े लिए !
ये जख्म है कि भरता ही नही,
क़्या ऊस्ल करे आशा के लिए!!
ओढ़कर चोला शराफ़त का,
यहाँ घूमते है हैवान नकावो में !
न कोख है अब सुरक्षित ,
न आबरू बची हिजाबों में !!
कितनों को तुमने निर्भया कर दिया,
कई आशिफाओ को तुमने माटी बना दिया !
इश्क़ करो तो.....................................
कब तक न्याय पुकारोगी तुम,
बिके हुए राजनेताओं से !
कल तक जो अंधा था क़ानून,
आज गूँगा बहरा भी हैं !!
अरे उठों आशिफ़ा , उठों निर्भया, उठों नारियों,
वस्त्र संभालो कोई न आगे आएगा !
अरे छोड़ आभूषण भुजा संभालो,
खुद ही अपना चीर बचालो !! --2...
~ प्रकाश द्विवेदी (Prakash Dwivedi )
+918602150751
#Prakashdwivedipoetry

Wowwww nice thoughts....
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