Sunday, May 12, 2019

मतदान करो

【●मतदान करो●】

इस देश के भाग्य विधाता हो तुम, मतदान आपका अधिकार बना है।
लोकतंत्र मजबूत हुआ है, अधिकारों को सम्मान मिला है।।

करो राष्ट्र की सेवा तुम, मतदान तुम्हारा शस्त्र बना है।
समानता का गीत लिखू मैं, संविधान तुम्हारा विधान बना है।।

अधिकारों में मौलिक अधिकार है, यह तंत्रो में लोकतंत्र हैं।
अनेकता में एकता का , सबसे बड़ा यह मंत्र है।।

अतीत की गुहार है, वर्तमान की पुकार है।
सब करो मतदान,ये लोकतंत्र का त्यौहार हैं।।

धर्म,जाति,लिंग भेद को करता ये बहिष्कार हैं।
अनुच्छेद 325,326 में कहता ये संविधान हैं।।

भव्य भारत का सपना है,और नए युग का प्रवेश है।
मजबूत होगा लोकतंत्र, यह संविधान का संदेश है।।

उज्जवल भविष्य की कामना में प्रकाश का यह शोध हैं।
इस देश की पहली जरूरत आप का यह वोट हैं।।

~प्रकाश द्विवेदी (prakash dwivedi)
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+918602150751





Saturday, March 23, 2019

My Diary 01

I'm happy with who I am. I love myself for my real personality. I love the way that i look. I love the talents and abilities that I have. I love my style. I love the way I see the world.
I love the way that I think. I love my sense of humor. I love myself even when I'm making mistakes. I don't care what others think of me. Because I love myself. Some thinks I'm self-obsessed but I'm not self-obsessed I'm self blessed.

#prakashdwivedi
~Prakash dwivedi
#prakashdwivedipoetry

I wake up to

   I wake up to


I wake up to   live   in  today

I wake up to find myself everyday.

I wake up to  feel  sun  rise  everyday .

I wake up to convert dream into reality

I wake up to creat myself better than   
yesterday.

~© Prakash dwivedi {प्रकाश द्विवेदी}
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 +918602150751

Friday, March 22, 2019

!! प्रेम होली !!


तुम रंगों की वर्षा बन के आना !और प्रेम रंग मुझपे बरसाना !!


●मिल जाए आज वो गोरी !!
जो चलायें प्यार की गोली !
जिसकी सूरत हो भोली !
जो प्रेम से खेलें होली !!
भींग सकू जिसकी वर्षा मे !
और रंग सकूँ मैं उसके रंग में !!


~© Prakash dwivedi {प्रकाश द्विवेदी}
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+918602150751




!! मैं युगों से प्यासा !!

मैं युगों से प्यासा पपीहा हूँ, तुम वर्षा बनकर आ जाओ !
हर रंग ज़माने का झूठा, तुम अपना रंग लगा जाओ !!


रूह को मेरे हर्षित कर दो,तुम फागुन बनकर आ जाओ !
ओढ़ के चुनर प्रेम रंग की , मरु जीवन में छा जाओ !!


मैं मंत्रमुग्ध हो जाऊंगा, तुम प्रेम से प्रीत लगा जाओ !
मैं रंग-गुलाल बन जाऊँगा, तुम ख़ुशबू बनके समा जाओ !!


होंठों से तुम रंग लगा के, सतरँगी सा कर जाओ !
मेरे सीने की धड़कन को, अतरंगी सा कर जाओ !!


ओ मृगनयनी, वर्षाधारा, पायल छनकाती आ जाओ !
बनकर के तुम चाय का प्याला, अन्तर्मन महका जाओ !!


मैं युगों से प्यासा पपीहा हूँ, तुम वर्षा बनकर आ जाओ !
हम थाल सजाएँ रंगों का , तुम प्रीत का रंग लगा जाओ !!
मैं युगों से प्यासा पपीहा हूँ, तुम वर्षा बनकर आ जाओ !!!



~©PRAKASH DWIVEDI (प्रकाश द्विवेदी)
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#prem

Friday, February 8, 2019

प्रेम का इज़हार

                    प्रेम का इज़हार

               मैं लिखता हूं तू कलम बन जा,
               मैं कहता हूं तो गजल बन जा!
               मैं चलूं तू मेरे कदम बन जा ,
               मेरी जीत का तू शिखर बन जा!!
               मै गाऊँ तू मेरी सरगम बन जा,
               तू दिल की मेरी धड़कन बन जा!


               हर पल जो मेरे पास रहें !
               तू ऐसी क़ोई महक बन जा!!
               तेरे माँग का मैं सिंदूर बनू ,
               तेरे स्वप्नों को मैं पूर्ण करू !!
               बिन बोले तेरे लफ्ज़ पढ़ू ,
               तुझसे मिलकर परिपूर्ण रहूँ ,
               तुझसे मिलकर परिपूर्ण रहूँ !!!



             तेरे सुख का मैं भागी बनू !
             तेरे दुख का मैं साथी बनू !!
             तुझे होंठो से मैं छूं पाऊँ !
            तू ऐसी कोई ग़ज़ल बन जा !!


            मैं लिखतें लिखतें लिख आया,
            इक प्रेम संदेशा लिख आया।
           मैं कहते कहते कह आया,
           तुमको मैं गजल मैं कह आया !!
                                        

~Prakash dwivedi (प्रकाश द्विवेदी)
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+918602150751




Sunday, December 16, 2018

इश्क़ (ISHQ )

https://youtu.be/wo1I-DhkZLc

                                  इश्क़

इश्क़ करो तो उसकीं रूह से करो ,
                                   आबरू से क़्यो करते हो !
 देखो तो दिल में देखो,
                                बदन को क़्यो देखते हो !!


या तो उसे बाग़ के किसी पुष्प की तरह संम्भाल कर रखों!
या  फिर  उसकी  शमा  में  जलकर    राख  हो   जाओ!!


लाख़ बंदिशे लगाई उसकी उड़ान पर,
                                             और काट दिए सारे पंख !
पर क़्या रोक सके उसकी उड़ान को?? 
                                   क़्या रोक सके उसकी उड़ान को!
किसी की रहमतों से नहीं ,
                                   अपने होशलों से बहती है वो !!

उसका समंदर जैसा प्यार भी,
                                तुम्हारी हवस रूपी तृष्णा को न मिटा सका !
तुम  काटते  रहे  सारे  पर ,
                                पर क्या रोक सके उसकी उड़ान को !!


तवायफ तो ढूंढ लेती है, औरतों में , नजरें तुम्हारी!
क़्या कभी तवायफ़ों में औरतों को देखा हैं ??


आशिफ़ा हैं मुनंतजिर, निर्भया हैं मुनंतजिर,
                             के शक्त कानून हो उन शैता क़े लिए !
ये जख्म है कि भरता ही नही,
                                  क़्या ऊस्ल करे आशा के लिए!!

 ओढ़कर चोला शराफ़त का,
                                    यहाँ घूमते है हैवान नकावो में !
न कोख है अब सुरक्षित ,
                                       न आबरू बची हिजाबों में !!


कितनों को तुमने निर्भया कर दिया,
                            कई आशिफाओ को तुमने माटी बना दिया !
इश्क़ करो तो.....................................


कब तक न्याय पुकारोगी तुम,
                                   बिके हुए राजनेताओं से !
कल तक जो अंधा था क़ानून,
                                   आज गूँगा बहरा भी हैं !!


अरे उठों आशिफ़ा , उठों निर्भया, उठों नारियों,
                           वस्त्र संभालो कोई न आगे आएगा !
अरे  छोड़ आभूषण भुजा संभालो,
                                    खुद ही अपना चीर बचालो !! --2...



                           ~ प्रकाश द्विवेदी (Prakash Dwivedi )
                           +918602150751
                            #Prakashdwivedipoetry